जिंदगी बड़ी लम्बी लगती है ना
पर कभी कभी
वक्त इतनी जल्दी गुजर जाता है
पता भी नही चलता ...
अजनबी से होते है सब
जब हम इस दुनिया मे आते है
ओर एक दिन अजनबी ही तो बन जाते है
जब हम इस दुनिया से चले जाते है
पर एक लंबा वक्त इस बीच
हमे मिलाती है अपनो से
कुछ मतलबी अपनो से ओर
कुछ जो अपने रहते है
पर अपने नही होते
ओर कुछ लगते तो है अपने है
पर एक चहरा छुपा होता है मतलब का
जिंगदी बड़ी लम्बी लगती है ना
पर होती नही ।
दीपक पटेल ( शब्बु )
✍
शुक्रवार, 16 नवंबर 2018
जिंदगी बड़ी लम्बी लगती है ना...
मैने फिर से ओढ़ी एक चादर
मैने फिर से ओढ़ी एक चादर
कोई सपना न आये
चैन से सोना है
कोई अपना न आये
सुकून ये तन्हाई में
कोई अपना न
बन जाये
सुकून नींद की
कोई छीन न
ले जाये
मैने फिर से ओढ़ी एक चादर
कोई सपना न आये
दीपक पटेल (शब्बु )
✍
बुधवार, 29 अगस्त 2018
ये हवावो की साजिश
ये हवावो की साजिश थी
या किस्मत की लकीरों में था
मंजिले कही और
मैं चला कही और
हकीकत बया करती
सफर बेगानी सी
चलना भी अकेले है
और राही भी मैं अकेला हु
ठोकरे तो मिलनी ही थी
और सम्हलना भी खुद ही था
उम्मीद बस खुद से थी
करीब कोई अपना न था
ये हवावो की साजिश थी
या किस्मत की लकीरों में था
दीपक पटेल ( शब्बु )... ✍
मंगलवार, 28 अगस्त 2018
अजनबी
अजनबी -
कोंन है ये अजनबी
वो जो अपने थे
पर किसी ने अपना न कहा
कोंन है ये अजनबी
जो मतलबो के भवर में
फसा के रखते थे
वे अपने थे
समंदर में इतनी तूफान ही नही आई
जो मेरी कस्ती डूबा सके
अपनो ने दो छेद क्या किये
मेरी कस्ती जो डूबी जो कि किनारे पे थी
कोंन है ये अजनबी...
दीपक पटेल ( शब्बु ) ✍
ये उन दिनों की बात है
ये उन दिनों की बात है
जब हम बच्चे हुआ करते थे
सच्चे और अच्छे हुआ करते थे
ये उन दिनों की बात है
जब हम बच्चे हुआ करते थे
हस्ते रोते अपने मे मस्त रहते
न कोई फिकर न परेशानिया होती थी
ये उन दिनों की बात है
जब हम बच्चे हुआ करते थे
होठो पे मुस्कान लबो पे हँसी होती थी
रूठना ओर मनाना पल पल में होता था
ये उन दिनों की बात है
जब हम बच्चे हुआ करते थे ।।
दीपक पटेल (शब्बु) ___ ✍
मैं चांद तारे तोड़ने की बात नही करता
मैं चांद तारे तोड़ने की
बात नही करता
मैं चांद तारे तोड़ने की
बात नही करता
लोग कहते है
चार दिनों की है जिंदगी
बस इन चार दिनों में
दो चार कदम चलने के लिए
साथ चाहिए तुम्हारा
जब मैं थक जाऊ
तुम थाम लेना
जब तुम थक जावोगी
मैं थाम लूंगा
मैं चांद तारे तोड़ने की
बात नही करता
दो चार कदम चलने के लिए
साथ चाहिए तुम्हारा
__दीपक पटेल ( शब्बु ) ✍
गुरुवार, 1 मार्च 2018
नादान हु
आता नही मुझे बहलाना किसी को
आता नही मुझे दिलो को जितना
छोटी सी जिंदगानी मेरी
गलतियों के समुंदर से भरा
बहुत कुछ सीखा मैंने
अब तक के सफर में
फिर भी हो जाती है गलतिया नादान जो हु
अब भी सिख रहा खुद को बेहतर कर रहा
मुझे मेरी गलतिया बता दिया करो
किसी को दिखे तो जरा
आपकी अच्छाई मुझे भी मिल जाये जरा
मैं भी आप अच्छे लोगो जैसा बन जाऊ जरा
दीपक पटेल ( शब्बु )__✍