ये उन दिनों की बात है
जब हम बच्चे हुआ करते थे
सच्चे और अच्छे हुआ करते थे
ये उन दिनों की बात है
जब हम बच्चे हुआ करते थे
हस्ते रोते अपने मे मस्त रहते
न कोई फिकर न परेशानिया होती थी
ये उन दिनों की बात है
जब हम बच्चे हुआ करते थे
होठो पे मुस्कान लबो पे हँसी होती थी
रूठना ओर मनाना पल पल में होता था
ये उन दिनों की बात है
जब हम बच्चे हुआ करते थे ।।
दीपक पटेल (शब्बु) ___ ✍
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