मंगलवार, 31 अक्टूबर 2017

मन बावरा कुछ सोचे न

मन बावरा कुछ सोचे न
जो आये वो ही कहने लगे
मन बावरा कुछ सोचे न
मुस्कुराते चहरे के साथ
कुछ यादों में बस जाती
मन बावरा कुछ सोचे न
मन के अंधेरी दुनिया मे
एक खुश्बू सी आने लगी है
बंजर दुनिया मे खुश्बू छाने लगी है
मन बावरा कुछ सोचे न
सोच में ही डूबी दुनिया इसमे
न पा के भी सब कुछ पा लेना
डर नही कुछ खोने का
यहा खुश्बू अपनी है जो मन मे बसती
मन बावरा कुछ सोचे न

दीपक शब्बु पटेल ✍

गुरुवार, 12 अक्टूबर 2017

रूठ के कुछ कदम आगे हम चल पड़े

रूठ के कुछ कदम आगे हम चल पड़े
ये उम्मीद थी आवोगे तुम पीछे सनम
मुड़ कर देखा न गया
कही दिल न टूट जाये ये डर भी था।
रूठ के कुछ कदम आगे हम चल पड़े
कर रहे थे इंतजार हम सनम
न तुम आई न कोई संदेश तुम्हारा
रात कैसे कटी तुमको हम क्या कहे
खुद को कोसते हुए करवटे बदलते रहे ,
रूठ के कुछ कदम आगे हम चल पड़े
हम ने माना कि तुम अब हमारे न रहे
यू रूठ जावोगी तुम हमने सोचा न था
याद उन बातों को हम अब कर रहे
जिनमे तुमने वादे किये थे अब वो झूठे लग रहे
क्या कहु तुमको अब तुम जो अब हमारे न रहे
रूठ के कुछ कदम आगे हम चल पड़े।।
दीपक पटेल (शब्बु)