बुधवार, 27 सितंबर 2017

मासूम बच्चे की दासता

मासूम बच्चे की दासता

मैं आया नहीं लाया गया था ,
मैं रोया नहीं रुलाया गया था,
वही से मेरी पहचान बतलाया गया था।
मुझे जो दिखाया गया मैं वही देखता था ,
मुझे जो सुनाया गया मैं वही सुनता था,
मुझे जो बोला गया वाही बोलता था।
दुनिया को देखा जैसे दिखाया गया था,
मैं आया नहीं लाया गया था ।
न रिश्तो की समझ थी न अपनों की पहचान ,
जो मुझे सिखाया गया मैं वही सीखता गया,
मैं आया नहीं लाया गया था।
ये दुनिया तो वैसी नहीं जैसा दिखाया गया था ,
जरूरत ही यहाँ सब कुछ है जरुरत नहीं तो कुछ भी नहीं।
मैं आया नहीं लाया गया था।
मुखावटे लगे अपनों के पीछे चालाकी को समझ पाउ कैसे,
कोई सिखला दे मुझे इन सबसे सम्हल पाउ मैं कैसे।
मैं आया नहीं मुझे लाया गया था।
वो माँ की लोरी वो पिता का प्यार ,
बस याद ही रह जाते है बड़े होने के बाद।
मैं आया नहीं लाया गया था फिर क्यों मुझे भुलाया गया था ।
मैं आया नहीं लाया गया था ।

दीपक पटेल


अजीब मोहब्बत

अजीब मोहब्बत
तुमसे मोहब्बत भी मैं करू ,
तुम्ही से बगावत भी मैं करू ।
जबसे तुम्हे सोचा  तुम्हारा ही हुआ ,
फिर भी मैं तुमसे दूर रहा ।
अपनी दर्द मैं कैसे कहु,
किस्मत से मिली हो तुम,
फिर भी किस्मत में नहीं तुम।
खुद को उस लायक कैसे बनाऊ,
जिससे तुमको अपना बना लू ।
तुमसे मोहब्बत भी मैं करू ,
तुम्ही से बगावत भी मैं करू ।
खुद को सोचता हु फिर तुम्हे ,
क्या इतनी मोहब्बत मैने की थी ,
की  तुमको परेसान करू,
तुम्हारे मोहब्बत के लायक भी तो मैं नहीं ।
अपनी तनहाइयों में तुम्हे सामिल कैसे करूँ,
इतनी खुदगर्ज मोहब्बत मैने ना की थी।
तुमको भुला दू वो तरीका बता दो,
की मैं तुमसे दूर चला जाऊ ।
तुमसे मोहब्बत भी मैं करू ,
तुम्ही से बगावत भी मैं करू ।
न हो मुझसे कोई ऐसी खता ,
की  तुम को तकलीफ हो मेरे खुदा ।
अपनी मोहब्बत रूहो की इबादत ,
जिस्म को तो एक दिन मिट जाना है।
तुमसे मोहब्बत बेइंतहा हम करते ,
अगर वो किस्मत हमें मिलता।
फिर भी मैं खुस हु ,
तुम्हारी यादो में मैं जो हु
चाह सको तो भुला दो मुझे ,
उसका गम मुझे नहीं ।
तुमसे मोहब्बत भी मैं करू ,
तुम्ही से बगावत भी मैं करू ।
दीपक पटेल (शब्बु)
deepaksabbu@gmail.com

सोमवार, 18 सितंबर 2017

मैं हु कोन

मैं हु कोन कोई न जान सका ,
मैं चाहू क्या कोई न पहचान सका ।
कोई साथ रहा अपने ही मतलब से रहा,
वो जाना ही नही मैंने क्या चाहा,
अपनो के साथ भी परायो सा लगता है ,
क्या कहु ओर किसे कोई अपना ही नही मिलता है ,
डर है मुझे इन लोगो के भीड़ से ,
कोई हस्ता है कोई रुलाता है
किसी को मेरी परवाह नही ,
बंद अंधेरे कमरे में मैं
खुद से बाते करता हु ,
एक खूबसूरत दुनिया मेरी हर पल खयालो में बसाता हु ,
कोई न जाने मुझे न कोई समझे मैं खुद से बाते करता हु ।
दीपल पटेल (शब्बु) ✍

एक ख़्वाब था उसका

एक ख़्वाब था उसका अंधेरी रात में साथ हो किसी का, चांदनी रात हो और उसके पास भी वो चांद सी हो,
एक ख़्वाब था उसका कोई थाम ले हाथ चाहे कुछ पल के लिए ,
एक ख़्वाब था उसका
सुनहरी धूप हो  जहा उसके जुल्फों के छाव तले उसकी गोदी में सर हो अपना ,
एक ख़्वाब था उसका कोई साथ हो जैसे रूह के बंधन बंधे हो हर सांसो की तरह ,
एक ख़्वाब था उसका जो कभी पूरा न हुआ वो चला गया अपने ख़्वाब हो पूरा करने कभी न उठने वाले नींद की आगोस में सोने वो चला गया ।

रविवार, 17 सितंबर 2017

तुम कोन थी

तुम कोन थी क्या थी
मेरे लिए अंधेरी दुनिया मे मेरी अपनी थी ।
भीड़ में रह के भी अकेला था ,
तुम एक सपने की तरह आई और खो गई ,
कहा ढूंढता तुम्हे ,
न मंजिल का पता था न तुम्हारा।
बस एक उम्मीद थी
तुम्हारे लौट आने की
बस एक उम्मीद थी तुम्हे चाहने की ।
तुम कोन थी क्या थी
मेरे लिए अंधेरी दुनिया मे मेरी अपनी थी ।
कुसूर क्या था मेरा तुमने अपना न समझा ,
फिर भी तुमसे मोहब्बत थी मेरी ।
मत पूछो उन पलों को
मत पूछो उन दर्द को
मत पूछो बिना रोये बहते उन अंसुवो को
मत पूछो न ढूंढ पाने की बेइंतहा तड़प को ।
तुम कोन थी क्या थी
मेरे लिए अंधेरी दुनिया मे मेरी अपनी थी ।
नादान था न मैं नादानी हो गई
एक अजनबी से मोहब्बत हो गई ,
पर आज मैं बहुत खुश हूं
मेरी मोहब्बत को देख तो पाया
भले ही उसे न पा सकू
पर उसे जान तो पाया,
खुसी भी थोड़ा दर्द दे गई
जब उसने कहा
न मैं कल तुम्हारी थी न आज हु न होउंगी कभी ,
मुस्कुरा के मैंने दर्द छुपा ही रहा था ,
उसने कहा मुझे मोहब्बत है पर किसी ओर से
मत पूछो आलम मेरे दिल का
सीने से निकाल ले कोई
तो भी न समेत पायेगा
इतने टुकड़े हुए
कोई देख के तड़प जाएगा ,
फिर भी समहाला खुद को
जब देखा उसके चेहरे में उदासी है
उसके दिल मे दर्द है
यही तो मोहब्बत है
दर्द जब उसे होता है तब अपना दर्द भी मीठा लगता है ।
उसकी चाहत मुझे उसे पाने की नही उसे हँसाने की है ,
भीड़ में गुम होने से पहले उसके दिल ❤मे बस जाने की है ।



दीपक पटेल ( शब्बू)