सोमवार, 18 सितंबर 2017

एक ख़्वाब था उसका

एक ख़्वाब था उसका अंधेरी रात में साथ हो किसी का, चांदनी रात हो और उसके पास भी वो चांद सी हो,
एक ख़्वाब था उसका कोई थाम ले हाथ चाहे कुछ पल के लिए ,
एक ख़्वाब था उसका
सुनहरी धूप हो  जहा उसके जुल्फों के छाव तले उसकी गोदी में सर हो अपना ,
एक ख़्वाब था उसका कोई साथ हो जैसे रूह के बंधन बंधे हो हर सांसो की तरह ,
एक ख़्वाब था उसका जो कभी पूरा न हुआ वो चला गया अपने ख़्वाब हो पूरा करने कभी न उठने वाले नींद की आगोस में सोने वो चला गया ।

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