शनिवार, 25 सितंबर 2021

बहुत भीड़ है न लोगो की

बहुत भीड़ है न लोगो की
पर मुझे महसूस नही हुई कभी
मैं कल भी था मैं आज भी हु
बस न कल कोई साथ था न
आज कोई है
हम अपनी परछाई से ही
कह लेते है हर बात
कोई और तो है नही
परछाई भी छोड़ जाती है साथ
मजबूरी है हर पल
दे नही सकती साथ मेरे
शिकायत किस्से करे
जब नाराजगी खुद से भी है
बहुत भीड़ है न लोगो की
पर मुझे महसूस नही हुई कभी
शब्बु ...✍🏻

घर मेरा जल रहा था

घर मेरा जल रहा था
मैं बैठ के देख रहा था
बुझाउ क्यो ये सोच रहा था
जब मेहनत अपनो ने की थी
जलाने की ......
उन्हें रुलाऊ क्यो ये सोच रहा था
घर मेरा जल रहा था
दीपक पटेल ( शब्बु  )✍🏻