बहुत भीड़ है न लोगो की
पर मुझे महसूस नही हुई कभी
मैं कल भी था मैं आज भी हु
बस न कल कोई साथ था न
आज कोई है
हम अपनी परछाई से ही
कह लेते है हर बात
कोई और तो है नही
परछाई भी छोड़ जाती है साथ
मजबूरी है हर पल
दे नही सकती साथ मेरे
शिकायत किस्से करे
जब नाराजगी खुद से भी है
बहुत भीड़ है न लोगो की
पर मुझे महसूस नही हुई कभी
शब्बु ...✍🏻