मंगलवार, 31 अक्टूबर 2017

मन बावरा कुछ सोचे न

मन बावरा कुछ सोचे न
जो आये वो ही कहने लगे
मन बावरा कुछ सोचे न
मुस्कुराते चहरे के साथ
कुछ यादों में बस जाती
मन बावरा कुछ सोचे न
मन के अंधेरी दुनिया मे
एक खुश्बू सी आने लगी है
बंजर दुनिया मे खुश्बू छाने लगी है
मन बावरा कुछ सोचे न
सोच में ही डूबी दुनिया इसमे
न पा के भी सब कुछ पा लेना
डर नही कुछ खोने का
यहा खुश्बू अपनी है जो मन मे बसती
मन बावरा कुछ सोचे न

दीपक शब्बु पटेल ✍

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