हम तो भूल गये थे ,
लिखना नही है कुछ ,
कुफ़्तगु ये जिक्र उनके लिये ,
पसंद नही उन्हें जिक्र ये खुशबू आये ,
कविता में कही ,
यू खयाल चल रही थी ,
जहन में मेरे ,
यू सुरुवात से अंत तक क्या खता थी मेरी ,
सवाल क्या करे गम तो उन्हें भी होगा ,
दिमाक से समझाते होंगे वो सही है ,
पर दिल को कब तक बहला पाएंगे,
यू खत्म न होगी सफर ये जिंदगी हमारी ,
हम याद बन के रह जाएंगे ,
होंगे जरूर हमसे बेहतर जमाने मे बहुत ,
पर मुझ जैसा ढूंढ पाएंगे कैसे ।।
दीपक पटेल ( शब्बु ) ✍
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