बुधवार, 29 अगस्त 2018

ये हवावो की साजिश

ये हवावो की साजिश थी
या किस्मत की लकीरों में था
मंजिले कही और
मैं चला कही और
हकीकत बया करती
सफर बेगानी सी
चलना भी अकेले है
और राही भी मैं अकेला हु
ठोकरे तो मिलनी ही थी
और सम्हलना भी खुद ही था
उम्मीद बस खुद से थी
करीब कोई अपना न था
ये हवावो की साजिश थी
या किस्मत की लकीरों में था
दीपक पटेल ( शब्बु )... ✍

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