शुक्रवार, 16 नवंबर 2018

मैने फिर से ओढ़ी एक चादर

मैने फिर से ओढ़ी एक चादर


कोई सपना न आये


चैन से सोना है


कोई अपना न आये


सुकून ये तन्हाई में


कोई अपना न


बन जाये


सुकून नींद की


कोई छीन न


ले जाये


मैने फिर से ओढ़ी एक चादर


कोई सपना न आये


दीपक पटेल (शब्बु )



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