अजनबी -
कोंन है ये अजनबी
वो जो अपने थे
पर किसी ने अपना न कहा
कोंन है ये अजनबी
जो मतलबो के भवर में
फसा के रखते थे
वे अपने थे
समंदर में इतनी तूफान ही नही आई
जो मेरी कस्ती डूबा सके
अपनो ने दो छेद क्या किये
मेरी कस्ती जो डूबी जो कि किनारे पे थी
कोंन है ये अजनबी...
दीपक पटेल ( शब्बु ) ✍
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें