शुक्रवार, 30 अगस्त 2019

आज कहा हु मैं

आज कहा हु मैं
ये तो मेरी मंजिल नही थी
न ये मेरे सपने थे
थोड़ा याद कर लूं
शायद याद हो मुझे
धुंधली सी याद है
कुछ ज्यादा सपने नही थे मेरे
यकीन न थी
जिंदगी इतनी लम्बी चलेगी
कुछ सपने थे जो उलझते हुए
पता नही कब और कहा खो गए
कुछ अपने भी मेरे  हुआ करते थे
कुछ रिश्ते भी मेरे अपने थे
कुछ खुशिया भी मेरे लबो पे थे
कुछ धुंधला सा याद है
कुछ उमीदें भी मुझसे थी
कुछ उम्मीदों में खो गया
कुछ अपनो को सम्हाल कर
मैं खुद को बिखेर गया
वो सपने थे कि वो अपने थे
शायद सच थे या सपने थे
कुछ धुंधला सा याद है
आज कहा हु मैं
ये तो मेरी मंजिल नही थी
दीपक पटेल ( शब्बु ) ....✍

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें